मां बगलामुखी का मन्दिर

दस महाविद्याओं में से एक मां बगलामुखी का मन्दिर है, यह पीताम्बरा पीठ। सन् 1978  महाराज जी द्वारा स्थापित यह देश के सबसे बड़े शक्तिपीठों में से एक है। ‘बगला’ शब्द संस्कृत के ‘वल्गा’ शब्द का अपभ्रंश है, जिसका अर्थ है, दुल्हन। देवी मां के अलौकिक सौन्दर्य के कारण उन्हें यह नाम मिला। पीले वस्त्र पहनने के कारण उन्हें पीताम्बरा भी कहा जाता है। ऐसी मान्यता है कि आचार्य द्रोण के पुत्र अश्वत्थामा चिरंजीवी होने के कारण आज भी यहां पूजा-अर्चना करने आते हैं।

शक्तिपीठ

इस  शक्तिपीठ की स्थापना प्राचीन काल में श्री श्री १००८ महा मंडलेश्वर स्वामी जी ने किला भरतपुर में की थी |इस मंदिर का जी्णोद्धार परम पूज्नीय महंत मोहनदास जी के द्वारा सन १९७८ में करवाया गया. मां का ये चमत्कारी धाम महाराज  जी के जप और तप के कारण ही एक शक्तिपीठ के रूप में देशभर में जाना जाता है.

मंदिर के आचार्य महंत मोहनदास जी बताते है कि चर्तुभुज रूप में विराजमान मां पीतांबरा के एक हाथ में गदा, दूसरे में पाश, तीसरे में वज्र और चौथे हाथ में उन्होंने राक्षस की जिह्वा थाम रखी है.

भक्तों के जीवन में मां के चमत्कार को आए दिन घटते देखा जा सकता है. लेकिन इस दरबार में दर्शनार्थियों को मां की प्रतिमा को स्पर्श करने की मनाही है.

माना जाता है कि मां बगुलामुखी ही पीतांबरा देवी हैं इसलिए उन्हें पीली वस्तुएं चढ़ाई जाती हैं. लेकिन मां को प्रसन्न करना इतना आसान भी नहीं है. इसके लिए करना होता है विशेष अनुष्ठान, जिसमें भक्त को पीले कपड़े पहनने होते हैं, मां को पीली वस्तुएं चढ़ाई जाती हैं और फिर मांगी जाती है मुराद.

कहते हैं विधि विधान से गुरुजी के सानिध्य में अगर अनुष्ठठान कर लिया जाए तो मां जल्द ही मुराद पूरी कर देती हैं. मां पीतांबरा को राजसत्ता की देवी माना जाता है और इसी रूप में भक्त उनकी आराधना करते हैं. राजसत्ता की कामना रखने वाले भक्त यहां आकर गुप्त पूजा अर्चना करते हैं. माँ पीतांबरा शत्रु नाश की अधिष्ठात्री देवी है और राजसत्ता प्राप्ति में माँ की पूजा का विशेष महत्व होता है.

मंदिर में मां पीतांबरा के साथ ही अमरनाथ महादेव और अग्रोवा महालक्ष्मी देवी ,काल भैरव, बटुक भैरव , इसी के साथ ही पातालिया हनुमान जी दर्शनों का भी सौभाग्य मिलता है. मंदिर के दायीं ओर विराजते हैं अमरनाथ महादेव, बायी ओर पातालिया हनुमान जी, मन्दिर के प्रागंण में आग्रोवा देवी तथा काल भैरव ,बटुक भैरव के दर्शन प्राप्त होते हैं |

मंदिर का पता

माँ पीताम्बरा शक्तिपीठ, किला भरतपुर, राजस्थान – 321001

माँ के अद्भुत दर्शन

कैसे पहुंचें

हवाईजहाज द्वारा: निकटतम हवाई अड्डा सांगानेर (जयपुर ) 200 किलोमीटर में है |

ट्रेन द्वारा: शक्तिपीठ भरतपुर  रेलवे स्टेशन से 2km की दुरी पर है।

बस द्वारा: शक्तिपीठ  भरतपुर बस स्टैड से 3km की दुरी पर है।

माँ पीतांबरा शक्तिपीठ दर्शन

कार्यकारिणी समिति माँ पीतांबरा शक्तिपीठ

नाम

पद

फ़ोन नंबर

श्री मोहनदास जी

अध्यक्ष

8209390931

श्री त्रिमोदन जी

सचिव

9887076114

श्री गायत्री सोनी

कोषअध्यष

9351940259

विनोद कुमार गुप्ता

विधि सलाहकार

9413592610

विष्णु कुमार शर्मा

मंत्री

9413425153

चन्द्रशेखर सैनी

उपमंत्री

9782634632

सौरव बंसल संगठन

मंत्री

9414357601

मानिक जाँगिड़ श्रम

मंत्री

7877045188

सजंय सैनी

सदस्य

9971830694

सजंय शर्मा

सदस्य

9461462249

धर्मेन्द्र सिंह

सदस्य

6367031519

श्री मोहनदास जी (अध्यक्ष) –  8209390931

श्री त्रिमोदन जी (सचिव) – 9887076114

श्री गायत्री सोनी (कोषअध्यष) – 9351940259

विनोद कुमार गुप्ता (विधि सलाहकार) – 9413592610

विष्णु कुमार शर्मा (मंत्री) – 9413425153

चन्द्रशेखर सैनी (पमंत्री) – 9782634632

सौरव बंसल संगठन (मंत्री) – 9414357601

मानिक जाँगिड़ श्रम (मंत्री) – 7877045188

सजंय सैनी (सदस्य) – 9971830694

सजंय शर्मा (सदस्य) – 9461462249

धर्मेन्द्र सिंह (सदस्य) – 6367031519

माँ को भेट हेतु संपर्क करे : 8209390931

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